ज़िंदगी ख़ूबसूरत है,

ख़ूबसूरती नज़र कहाँ आती है,

ख़ुशियाँ कुछ पल की भी,

सुकूं से कब मिल पाती है,

हमसफ़र मिलते हैं इस मोड़,

उस मोड़ तक बिछड़ जातें हैं,

इत्मीनान से वक़्त यूँ भी,

अक्सर अल्फ़ाज़ लबों से कम,

पन्नों पर बयां अधिक नज़र आतें हैं,

ज़िंदगी बेतरतीब सी ख़ूबसूरत है,

कायदे से जीएं तो ज़िंदगी तन्हां नज़र आती है|