भोर की लाली में नहाई, वो आई, मौसम पर मदहोशी सी छाई, वो आई, चैन मेरा ले लिया, बेकरार कर दिया, जब से मेरे दिल में वो समाई, भोर की लाली में नहाई, वो आई। सनसनाती हवाओं से, मुस्कुराती फिजाओं से, गुनगुनाती घटाओं से, धड़कते दिल सी वो घबराई, मौसम पर लाली सी छाई, वो आई। चांदनी चांद से जैसे, रागिनी राग से जैसे, अपने मचले- मचले दिल को छिपाई, इस कदर वो शरमाई, मौसम पर मदहोशी सी छाई, वो आई।