नई लहरों का वर्ष नया है,
नई है भूमि, संघर्ष नया है,
कोयल की वह कूक नई है,
इच्छाओं की धूप नई है,
सपनों का संदेश अलग है,
बाधाओं का वेश अलग है,
दूर तलक है हमको जाना,
राह में थक कर ना रुक जाना।
भौंरों की गूंजन कहती है,
चिड़ियों की चीं-चीं कहती है,
झींगुरों की झिन-झिन कहती है,
संदेश नया है लाना,
राह में थक कर ना रुक जाना।
बीती यादों के धूमिल कण,
मानव विकास का उलझा क्षण,
जो कुरूक्षेत्र का हुआ था रण,
था कर्म-भाग्य का अमर जड़।
अतीत से सीखो नया संदर्भ,
भविष्य को दो कुछ अच्छे अर्थ,
जनम-मरण से क्या घबराना,
राह में थक कर ना रुक जाना।
नये स्वरों से साज़ सजा दो,
नये कर्म से भाग्य जगा दो,
छलका दो छल-छल अमृत जल,
रोक सके ना तुम्हें जमाना,
राह में थक कर ना रुक जाना।
आविष्कारों की झड़ी लगा दो,
देश को विकसित कर दिखला दो,
अमरता का लो अमर वरदान,
बनाओ अपनी अलग पहचान,
जीवों की कर रक्षा, दे सहारा,
भटके ना कोई होकर आवारा,
है रोग-दोष को दूर भगाना,
राह में थक कर ना रुक जाना।
अब देना है नया उदाहरण,
लुट न जाये मनका अपनापन,
काम है ऐसा अब कर जाना,
याद करे जिसको ये जमाना,
राह में थक कर ना रुक जाना।