मैं कवि नहीं हूं जो कविता सुनाऊं,
रोचक शब्दों से तुम्हारे दिलों को बहलाऊं,
मैं दुष्ट प्रकृति का दानव हूं,
तुम्हारी बुराइयों से बना हुआ मानव हूं।
चाहता हूं तुम्हारी भावनाओं को जगाना,
तुम्हारे आत्मा की पूर्ण शुद्धि कराना,
तुम्हारे रास्ते में तीखे कांँटें बिछाना।
जब इसपर चलकर पार पाओगे,
मरी हुई आत्मा की चीत्कार पाओगे,
बलिदानों से निकला अवतार पाओगे,
तब तुम सुन्दर संसार पाओगे।