"हम जैसे आवारा" क्या नहीं किया करते हैं,
बाहों को फैलाकर प्यार का पैगाम दिया करते हैं,
राह में भटके लोगों के बीच, दीप बनकर जलते हैं,
"हम जैसे आवारा" क्या नहीं किया करते हैं।
दुखों का सीना चीर, आशाएं उनमें भरते हैं,
देश की बात जब आती है,जान हथेली पर धरते हैं,
"हम जैसे आवारा" क्या नहीं किया करते हैं।