
ना जाने क्या छुपा रक्खा है ख़लाओं में
मैंने नज़र को टाँग रक्खा है हवाओं में
क्या करोगे मेरे मरज़ का इलाज तुम
तुमने ज़हर म
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ना जाने क्या छुपा रक्खा है ख़लाओं में
मैंने नज़र को टाँग रक्खा है हवाओं में
क्या करोगे मेरे मरज़ का इलाज तुम
तुमने ज़हर म