तुमसे मिल के अब जाके ये दिल कही ठहरा सा है ...थका हुआ था न जाने कबसे । कभी इधर कभी उधर । कभी इसका तो कभी उसका। अब बस आगे तुम्हारे साथ ही बढ़ना चाहता है। अब बस यही रुक जाना चाहता है। तुम में ही अपना घर बना बैठा है। सुकून तोह बहुत मिलता है तुमसे , लेकिन तुम्हें अगर खो दिया कभी ज़िन्दगी के दबाव में तोह मेरे दिल की अवस्था वैसी ही होगी जैसी एक जले हुए घर की रह जाती है।

                                                                                       ~chahat.nony