जब मन में घोर निराशा हो।

जब शोक ह्रदय पर हावी हो।।

जब जीत के लाले पर जाएँ।

जब हार अवश्यम्भावी हो।।

तब कलम ये मेरी लिखती है।

एक उज्जवल आस जगाने को।।

मैं कवि हु मेरे शब्द हैं ये।

मेरे दिल के भाव बताने को।।।

जब चहूँ ओर अँधियारा हो।

जब तमस क्षितिज पर छाया हो।।

जब लहू रगों का अश्रु बन।

नयनों में भर भर आया हो।।

तब कलम ये मेरी लिखती है।

एक नया सवेरा लाने को।।

मैं कवि हु मेरे शब्द हैं ये।

मेरे दिल के भाव बताने को।।।

जब मंजिल करे इशारे पर।

हो कठिन चुनौती राहों में।।

जब हिम्मत टूट बिखर जाये।

असमंजस के भावों में।।

तब कलम ये मेरी लिखती है।

लक्ष्य को गले लगाने को।।

मैं कवि हु मेरे शब्द हैं ये।

मेरे दिल के भाव बताने को।।।

जब चारो ओर अँधेरा हो और,

तमस क्षितिज पर छाया हो।

जब रगों का शोणित अश्रु बन।

नयनों में भर-भर आया हो।।

मंजिल का पता तो हो लेकिन।

राह सभी दुश्वार लगे।।

हाथों की लकीरें रूठी हो।

जीवन भी बेजार लगे।।

तब कलम ये मेरी लिखती है,

एक नया सवेरा लाने को।

मैं कवि हूँ मेरे शब्द हैं ये,

मेरे दिल के भाव बताने को।।