एक अजीब सी खलिश है तनहा रातों की सरगोशी में।
शोर मचाती यादें हैं उदास धड़कनों की ख़ामोशी में।।
जज्बातों का बजूद खोया रूह जिश्म से रूठ गया।
मगर इश्क की कशक है जिन्दा चाहत की मदहोशी में।।
अश्रु रुपी स्वप्न मिलन के नयनों में मझधार बने।
उनकी वफ़ा के किस्से मेरे जीवन के श्रृंगार बनें।।
धुंधली सी परछाई उनकी दिल की दीवारों पर उभरी।
उनके शब्द शायरी में ढल मेरे करुण पुकार बनें।।


