झुंड बनाकर आते हैं।

फल फूल रहा, उसे खाते हैं।

रक्षा करने वाले सब,

लाचार नजर से आते हैं।


इनकी न कोई सुनवाई,

करते अपनी मनमानी हैं ।

अनुकूल जो मौसम देखते हैं,

नस्ल फसल खा जाते हैं ।


चेहरा झुंड का बड़ा निराला,

हो टिड्डी या मानव का,

लोगों ने है अक्सर देखा,

रूप उनमें महादानव का।