तुम वो एहसास हो,जिसे कागज़ पर उतारा है मैने।

कभी शायरी,कभी ग़ज़लों में तुमको सँवारा है मैने।।

तुम्हारी एक याद ही काफी है,हमारे होठों की हँसी को।

तुम्हें याद कर करके खुद को निखारा है मैने।।