घनी धूप में,शीतल पेड़ की छाया है।
उनके साये में खुद को महफूज़ पाया है।।
जिसने उंगली पकड़कर मुझे चलना सिखाया है।
माँ का प्यार भी उनसे ही पाया है।।
जिनकी डाँट में भी फिक्र हमारी होती है।
जो हम उदास हों,उनकी भी आँखें रोती हैं।।
हर मुश्किल में सदा साथ जिसने निभाया है।
ऐसा पिता किस्मत से मैने पाया है।।

