अब बस बहुत हुआ,रीत ये बदलना होगा।
अपने सम्मान की रक्षा,खुद नारी को करना होगा।।
वैसे तो परिवार की खातिर, हर मुश्किल से लड़ जाती है।
पर देख के उन हैवानों को,जाने क्यों वो डर जाती है।।
खुद को मजबूत बनाओ इतना,तूफानों के सामने खड़े पर्वत जितना।
अब नहीं डरेगी नारी, हैवानों को डरना होगा।
अब बस बहुत हुआ,रीत ये बदलना होगा।
अपने सम्मान की रक्षा खुद नारी को करना होगा।।
