जो इश्क़ तुझसे है,वो किसी और से कभी हो नहीं पाया।
मैंने लाख इस दिल को समझा के देख लिया।
इक तेरे नाम से ही है मुकम्मल मेरी ग़ज़लें।
अपनी शायरी से तेरा नाम मिटा के देख लिया।।
जो सुकून तेरी आँखों में है,वो कहीं और ना मिला,
कितना भी अपनी महफिलों को सजा के देख लिया।।
तू ज़िंदगी में मेरी धड़कनों की तरह रहता है।
मौत से मैंने रिश्ता निभा के देख लिया।।

