अहसास-ए-मुहब्बत बताऊंगी किसी रोज।
किस्सा इस दिल का सुनाऊंगी किसी रोज।।
बड़ी बेचैन रहती हैं आँखें तेरे दीदार को जाँना।
कोई हँसी ख्वाब इनको,दिखाऊंगी किसी रोज।।
तुझसे इश्क़ मेरे दिल को कितना है ऐ जान
टूट कर फिर तुझे मैं चाहूँगी किसी रोज।।
तेरी मुस्कुराहटों में शामिल है मेरे दिल का सुकूँ।
हँसता हुआ देखकर तुझे,मुस्कुराऊंगी किसी रोज।।

