ये वक्त का तकाजा है कि खामोशी इख्तियार कर लूँ।


खुद को समेट लूँ,और तन्हाईयों से प्यार कर लूँ।।


यूँ तो ज़ख्मों से छलनी हुआ है ये दिल मेरा।


अब मुमकिन नहीं फिर किसी पे ऐतबार कर लूँ।।


हजारों शिकवे,शिकायतें लिख रखे थे आँखों में अपनी।


आँखें ये कहती हैं पहले उनका दीदार कर लूँ।।