ठहरे हुए दरिया की रवानी लिख दी।
अधूरी मोहब्बत की हमने पूरी कहानी लिख दी।।
उसका नाम होठों पे आने ना दिया कभी।
अहद-ए-वफा को हमने उसकी निशानी लिख दी।।
देने को तोहफे में जब कुछ ना मिला जब हमें।
नाम उसके हमने सारी जिंदगानी लिख दी।।


ठहरे हुए दरिया की रवानी लिख दी।
अधूरी मोहब्बत की हमने पूरी कहानी लिख दी।।
उसका नाम होठों पे आने ना दिया कभी।
अहद-ए-वफा को हमने उसकी निशानी लिख दी।।
देने को तोहफे में जब कुछ ना मिला जब हमें।
नाम उसके हमने सारी जिंदगानी लिख दी।।