बख़्शे हम भी ना जाएंगे,
बख़्शे तुम भी ना जाओगे।
दिन,रोज़ क़यामत के सब का हिसाब होगा।
मक्कारियाँ ओढ़े फिरतें हैं जो चेहरों पे अपने,
खुदा के सामने हर पर्दा बेनक़ाब होगा।।


बख़्शे हम भी ना जाएंगे,
बख़्शे तुम भी ना जाओगे।
दिन,रोज़ क़यामत के सब का हिसाब होगा।
मक्कारियाँ ओढ़े फिरतें हैं जो चेहरों पे अपने,
खुदा के सामने हर पर्दा बेनक़ाब होगा।।