इक ज़रा सी भूल से,हाथों से छूट जाता है।
शीशे की मानिंद नाज़ुक है दिल,टूट जाता है।।
सोच समझ कर कीजिए अल्फाज़ों का इस्तेमाल,
एक ज़रा सी बात पर हाथों से हाथ छूट जाता है।।
कोई करता है ज़ख़्म अपने शब्दों से यहाँ।
कोई मीठा बोल के दिल लूट जाता जाता है।।
मैंने मुहब्बत की है उससे इबादतों की तरह।
फिर क्यों वो हर बार मुझसे ही रूठ जाता है।।

