मुझको तोड़िए हर पल सदा।
टूट के बिखर गए तो आपका शुक्रिया।।
अहसास नहीं है अभी दर्द का हमें।
ज़ख्म बढ़ जाएं तो आपका शुक्रिया।।
दीजिए बद्दुआएं जी भर के।
अगर हम मर गए तो आपका शुक्रिया।।
अभी ग़म के आलम में हूँ कुछ देर।
अहसास सभी मर जाएं तो आपका शुक्रिया।।
वो बेचैनी वो तड़प जाती नहीं।
सदाएं भी लौट कर आती नहीं।
ये वक्त अगर बदल जाए तो आपका शुक्रिया।।
--बुशरा-

