ऐसी भी क्या ज़िद इस दिल ने पाल रखी है।

दिल में गम,होठों पे हँसी कमाल रखी है।।

जीने की ख़्वाहिश में मरने चले हैं देखो।

ये कैसी बेचैनी, कैसी उलझनें डाल रखी है।।