मुद्दतें हो गयीं तुझसे दूर हुएपर आज भी तू करीब सी लगती है,मुझे आज भी सूरज की शफ़क़तेरी चुनर सी लगती है।
मुद्दतें हो गयीं तुझसे दूर हुएपर आज भी तू करीब सी लगती है,
मुझे आज भी सूरज की शफ़क़तेरी चुनर सी लगती है।