हाँ आंखों को आज से पहले भी भाए थे कुछ लोग पर कभी किसी का अपनापन भी इतना अपना सा न लगा,
मिलके भी कभी न मिले ना मिला सा लगा,
फिर एक तुझे देखा बस पहली ही नज़र में सब अपना सा लगा,
यूँ तो मिलें भी नही है तुमसे पर बिना मिले ही जन्मो का रिश्ता सा लगा,
जताने भर से गर डरे भी कभी तो बस तुझको ना पाने से ज़्यादा खुद को खोजाने का लगा,
चाहत मेरी हूर परियों की नही, पर तुझसे ज्यादा हशीन तो वो भी नहीं,
हम खुद को सौंप बैठे हैं तुझे अब तू यूँ जो मिले हो बस अब अपना लो चाहे ठुकरा दो सदा के लिए।


