लिबासज़ख्म दिल पे इतना गहरा था,कि निशां जिस्म से..रूह तक में उतर चुके थे,हम भला लिबास ओढ़कर...छुपाते भी तो क्या?
लिबास
ज़ख्म दिल पे इतना गहरा था,कि निशां जिस्म से..रूह तक में उतर चुके थे,हम भला लिबास ओढ़कर...छुपाते भी तो क्या?