ये जिस्म को रंगों से तरबतर करके होली ...मैने हर साल खेली है,इंतेज़ार में हैं उस पल का जब बिना जिस्म को छुये ...तू मेरी रूह को भी रंग दे।
ये जिस्म को रंगों से तरबतर करके होली ...मैने हर साल खेली है,
इंतेज़ार में हैं उस पल का जब बिना जिस्म को छुये ...तू मेरी रूह को भी रंग दे।