तू न पूछे तो कौन ये बूझेगा
तू ही बता दरिया मेरे साथियाँ
तू जो है छूटा है तू कहाँ
पूछे ये ज़मीर खुद से आसमान
अब भी रूठा तू है कहाँ साथियाँ
मंज़िल मेरी तू मुलज़िम नहीं हाँ
मुजरिम तो दूर बैठा ओ साथियाँ
अब भी छूटा तू है साथियाँ?
तू जो चुप है, डर है मेरे दरमियाँ
तू है छिपा अब तो बता है कहाँ साथिया
डर भी डरा, घर भी जला
अब भी तू है छिपा कहाँ......
[End]
