समंदर में उतरते जा रहे हैं
हवादिस से गुज़रते जा रहे हैं
हमारे शेर खुश्बू की तरह है
फिज़ाओ में बिखरते जा रहे हैं
मोहब्बत का पढ़ा है दर्स जबसे
हमारे दिल संवरते जा रहे है
फ़लक से छुप गया कोहरे में सूरज
परिंदे फिर ठिठुरते जा रहे हैं
अमीरों के वो सहजादे है शायद
मेरी ग़ुरबत पे हंसते जा रहे हैं
उन्हें मंजिल मिलेगी 'राज़' कैसे
वो रस्ते में ठहरते जा रहे है