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सूरत और सीरत


जुगनुओं की रोशनी से तीरगी हटती नहीं,

आइने की सादगी से झूठ की पटती नहीं

चाहे लाख नकाब लगाये रहिए चेहरे पर

सूरत के पीछे की असली सीरत छिपती नहीं

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