कविता-श्राप's image
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ये सभ्यता खत्म होगी
बेजुबानों के श्राप
भूखे भटकते
श्वानों की सूनी
आँखों की बेबस
पुकार
दुग्ध की अंतिम बूँद
निचोड़
हाड़ कंपाने वाली
ठंड में
में मरने के लिए
छोड़ दी गई

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