ग़ज़ल-दिल का दर्द's image
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नफ़रत  के बाज़ार  सजे हैं प्रेम डगर पर पहरा  है
दिल का दर्द जुबां से होकर आँखों में आ ठहरा  है

उसका आना स्वर्ग सरीका उसका जाना लुट जाना
उसकी  ख़ामोशी  है क़ातिल  सन्नाटा  भी गहरा  है

मेरी  आँखों  में आ बैठा उसकी  आँखों  का  पानी

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