कल रात,

जब थका हारा ऑफिस से लौटा अपने फ्लैट पर;

सिर्फ बिस्तर दिखा दिनभर की थकान मिटाने को।


दिखा नहीं,

कामवाली मौसी का टेबल पर रखा हुआ खाना,

और गलती से खुली छोडी हुई खिड़की।


याद नहीं,

कब उस खिड़की से आता कोलाहल;

मेरे अंदर के कोलाहल में मिलकर शांत हो गया। 


सुबह हुई,

नींद आधी खुली तो सुना वो शोर;

सुनकर लगा कि नीचे जाऊं और सबको चुप करा दूं।


बिस्तर से उठा,

खुली खिड़की को कोसते हुए बंध करने जा रहा था;

उसी वक़्त दिखी एक चिड़िया,बैठी हुई, बोलती हुई।


प्रश्न उठा,

मैंने चिड़िया को कैसे नहीं सुना?

वो तो पास थी।


Brinda @fly_inwards