चंद साँसें गर्म सी, कुछ नमकीन से पल
चंद आहें सर्द सी, कई तकरारें चटपटी-चंचल
चंद यादें भींगी-भागी, कुछ मीठे-खट्टे एहसास
और जीवन से भी लंबे कुछ लम्हे, सूखे-टूटते-सिसकते अविरल
स्याह सी तनहाईयाँ, सिमटे हुए पल,
और पन्नों में दबे कुछ बसंती फूल
सुर्खियाँ आँखों में, ठहरी हुई,
कुछ आँसुओं की मेहर तो कभी सिर्फ़ थोड़ी धूल
हवा के झोंके से बीतने वाले चंद खुशी के पल,
ठिठोली करते हुए से लगते हैं
और कहीं यौवन की गोद में,
मोहब्बतों-ख्वाहिशों की कराहें रहती हैं झूल
ज़मीर की इक सफेद चादर पर
दर्द के इतने रंगों की रंगोली है
मेरा जीवन भी एक होली है


