तेरी याद (कविता)'s image
461K

तेरी याद (कविता)

नित (रोज) सवेरे उठकर मैं, 
चौखट पे खड़ा देखता हुं, 
गुंजन करते पक्षी को मैं, 
ध्यान लगा के सुनता हुं। 

हर रोज मैं तेरी यादों को, 
दिल में संजोकर रखता हुं, 
सुध करके तेरी बातों को, 
चेहरा छुपाकर रोता हुं। 

Read More! Earn More! Learn More!