मुल्क मेरा 
या मुल्क तेरा
एक ही शाम है
एक ही सवेरा
एक ही बाग
एक ही बसेरा
एक ही रौशनी
एक ही अंधेरा
दोनों मुल्क पर आतंक का है घेरा
दोनों मुल्क का आतंक ही लुटेरा
होंगे नाकाम इरादे इनके
मिट जाएगा आतंक का अंधेरा
जब बढ़ेगा कदम और मिलेंगे हाथ
एक तेरा एक मेरा