ख़ुद को तलाशने के बाद बहुत हैरानी में हूँ

आज पता चला मैं कितने पानी में हूँ

कब मिट जाये मेरा वजूद कुछ पता नहीं

बना हूँ शीशे का और पत्थरों की निगरानी में हूँ

हर वक़्त मौत देती है दरवाज़े पे दस्तक

आईना देखता हूँ लगता है अभी जवानी में हूँ

वो मुझे ढूँढता फिरता है साहिल की रेत में

कोई बताये उसे मैं दरिया की रवानी मे हूँ

मुझे भी तो अपनी कुछ ख़बर नहीं है

न कोई किरदार है मेरा न किसी कहानी में हूँ