जिस्म, रूह, दिल​-ओ-जान क्या बता तुझे चाहिये सामान क्या मेरी परवरिश मुझे ख़ामोश किये है मेरे मुँह में नहीं है ज़ुबान क्या ये जो ख़्वाबों में रोज़ आ जाती हो नींद में रखती हो मेरा ध्यान क्या बात​-बात पर मशवरा देते हैं बच्चे हो गये हैं जवान क्या जिसके लिये मक़्तल गये गाते हुए यही है भगत का हिन्दुस्तान क्या उठा लिये बीड़ा मज़हब बचाने का कभी पढ़े हो गीता-क़ुरान क्या