घोटालों की मार न होती।
सोचो भारत क्या होता ।।
जनहित और देशहित कैसा।
हर नेता को प्यारा पैसा।।
भ्रष्ट अगर सरकार न होती।
सोचो भारत क्या होता।।
शासन और प्रशासन ढीले।
अश्रुधार से दामन गीले।।
नारी का सम्मान भुलाया ।
हैवानों ने खूब सताया।।
गर यूँ चीख पुकार न होती ।
सोचो भारत क्या होता ।।
जाति धर्म पर झगड़े दंगे ।
मानवता से पूरे नंगे।।
आरक्षण भी एक है कारण ।
कैसे होगा इसका निवारण ।।
शिक्षा पर गर मार न होती ।
सोचो भारत क्या होता ।।
मरता नहीं किसान भूलकर।
कर्जों के फंदों से झूलकर।।
मंहगाई की मार न होती ।
सोचो भारत क्या होता ।।
घर-घर की बस एक कहानी ।
सास बहू में आनाकानी।।
भाई को भाई न प्यारा।
बंटवारे की सबने ठानी ।।
पिता नहीं यूं घुट के जीता।
गर बूढी मां लाचार न होती।।
सोचो भारत क्या होता।।
कायम अमन चैन कब होगा।
देश मेरा विकसित जब होगा।।
ठनी अगर तकरार न होती।
सोचो भारत क्या होता।।
घोटालों की मार न होती ।
सोचो भारत क्या होता ।।
भ्रष्ट अगर सरकार न होती ।
सोचो भारत क्या होता ।।