"तुम कौन हो ?"

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भूख लगती है न तुम्हें

तो रोटी-सब्जी खाते हो ।


कुछ चटपटा कुछ अटपटा

जो मिले सबकी कीमत चुकाते हो ।


पेट भर जाने पर

उन्हें देशद्रोही बताते हो ।


वे मेरे देश की माटी है,

बादल, जल और जीवन बाती है ।


हां, वे मेरे और तुम्हारे

हम सबके पेट के अन्नदाता है ।


वे सत्ता की त्रासदी से नष्ट हो रहे हैं

और तुम उन्हें छद्मवेशी बताते हो ।


तुम कौन हो मेरी देश की संसद

या हो मेरे देश की सरकार ???

   - ✍️ रंजन साव