ए मन ए थके हुए से रुके हुए से जमे हुए से थमे हुए से बेमन, ए मेरे टूटे से तिकडे से मन थक कर सुस्त हो चुके खस्त  हो चुके अस्त हो चुके व्यस्त हो चुके ध्वस्त ही चुके पस्त हो चुके ए मेरे छण भंगुर से मन ए मन चल तो ! अब उठ सम्भल ज़रा निकल ज़रा बहल ज़रा उछल ज़रा चहल ज़रा पहल ज़रा कुछ तो खुद को बदल ज़रा   ए मन बेफिक्री ला अपने अंदर काहे नाचे जैसे बंदर चल, तैरें जैसे मस्त समंदर चल न उठ, जो हुआ वो पीछे छोड़ आते हैं आज निकलते हैं कोई नई दिशा मोड़ जाते हैं साला आज कोई पहाड़ तोड़ लाते है,