ए मन
ए थके हुए से
रुके हुए से
जमे हुए से
थमे हुए से
बेमन,
ए मेरे टूटे से तिकडे से मन
थक कर सुस्त हो चुके
खस्त हो चुके
अस्त हो चुके
व्यस्त हो चुके
ध्वस्त ही चुके
पस्त हो चुके
ए मेरे छण भंगुर से मन
ए मन
चल तो ! अब उठ
सम्भल ज़रा
निकल ज़रा
बहल ज़रा
उछल ज़रा
चहल ज़रा
पहल ज़रा
कुछ तो खुद को
बदल ज़रा
ए मन
बेफिक्री ला अपने अंदर
काहे नाचे जैसे बंदर
चल, तैरें जैसे मस्त समंदर
चल न उठ,
जो हुआ वो पीछे छोड़ आते हैं
आज निकलते हैं
कोई नई दिशा मोड़ जाते हैं
साला आज कोई पहाड़ तोड़ लाते है,