फौजी


लोट के आया हु में

बस तिरंगे में लिपटकर आया हूं


बचपन मे खेला जिस आंगन में

उस आंगन को विदा करने आया हु


जिस आंखों को रोते नही देखा 

उस आँखों को रुलाने आया हु


गर्व होगा आज तुजे माँ

जंग से जो शहिद हो के आया हु


मेरा सामान खोल देख लेना माँ

में मेडल भी साथ लाया हूं


रखे है कुछ पैसे पॉकेट में

बेहना को देना, राखी के पैसे लाया हू


ना दे शका कंधा अपना पिता को 

बस पिता के कंधे का सहारा मांगने आया हु


माफ करना मेरी प्रियतमा 

तेरी जिंदगी के लिए में अंधेरा लाया हूं


ना दे सका प्यार मेंरे बच्चो को

उसके लिए साहस की कहानी बनके आया हु

 

फौजी हु में दोस्त

में तो भारत माँ को बलि दे के आया हु


- बिरजू गोहेल