इस देश से कोई रोटी पकाता है


कोई ईमानदारी की 

तो कोई ईमानदार की रोटी खाता है


सच कहूं तो इस देश से कोई रोटी पकाता है


कोई देश बेचकर 

तो कोई देश बचाकर आराम से सोता है


सच कहूं तो इस देश से कोई रोटी पकाता है


कोई जूठा तो

कोई सच्चा ,इस देश को चलाता है


सच कहूं तो इस देश से कोई रोटी पकाता है


कोई बेटी की

तो कोई बहु की इज़तत लुटता है


सच कहूं तो इस देश से कोई रोटी पकाता है


कोई गुनाह तो 

कोई बेगुनाह फाँसी पे चढ़ता है


सच कहूं तो इस देश से कोई रोटी पकाता है


कोई गद्दारी 

तो कोई देश भक्ति दिखाता है


सच कहूं तो इस देश से कोई रोटी पकाता है


कोई पक्ष

तो कोई विपक्ष एक दूझे को कोसता है


सच कहूं तो इस देश से कोई रोटी पकाता है


कोई अमीर

तो कोई गरीब को सोषता है


सच कहूं तो इस देश से कोई रोटी पकाता है


- बिरजू गोहेल