बारिश
कुछ बूंद यू बरस गयी बारिश की
कुछ खुश्बू यू महक गयी मिट्टी की
खिल खिल उठा आज है वन
लोटी वापस पेड़ो पे भवँर
कुछ आवाज यू गूंज रही
जैसे कोयल की कुकन
मोर बड़े नाच रहे वन
जैसे कलाये खिली है मन
बड़े बड़े हुवे है खुश
जैसे लौटा है बचपन
नाव पानी मे तैर रही
फिर से लौटा है बचपन
चारो ओर है घने बादल
बिजलिया हो रही है जटपट
सौर कर रहा है शीतल सा पवन
गर्म हवा गयी है घर
खुश हुवा किसान का हल
दाने बो रहा जटपट
नदिया तालाब पानी भर रही
जैसे मिला बरसो बाद सावन
चिड़िया चु चु कर रही
खिला है आज एक ओर फूल
खिली है चारो ओर खुशी
जैसे देश लौटा है चमन
-बिरजू गोहेल
