तन की इस निर्माणशाला में
मर्त्य मनुष्य श्रमरत है निरंतर;
जानकर भी, अनजाने भी,
प्रतीक्षारत उस घड़ी का
जब यह कारखाना सदा के लिए थम जाएगा।
निश्चित है उसका आगमन।
तब ऊँच-नीच, जाति-पाँति, पद-प्रतिष्ठा के
सभी भेद मिट जाएँगे,
और हर मानव को मिलेगी एक समान पेंशन:
अंतहीन विश्रांति,
जिसे हम कहते हैं मृत्यु,
जीवन का अंतिम आश्चर्य-उपहार।॥

