"दश्मनों की जन्मभूमि में

जन्म लेना पाप है,

पर उसी धरती पे जीना

सबसे गहरा अभिशाप है।


सोचा था —

मृत्यु के बाद कहीं

नरक का द्वार खुलेगा,

पर जीवन की राहों में ही

वह हर दिन सामने मिलेगा।


नरक कोई दूर गगन में

छिपा हुआ संसार नहीं,

यहीं धरा पर जलता रहता

उसका अंधकार कहीं।


जब दुश्मनों के बीच मनुष्य

जीवन जीने को बाध्य होता,

तभी यहीं इस धरती पर

नरक का जन्म स्वतः होता।"