काम्यकला--------------“इस अधिकार-वैभव के शिखर पर,धन के निकट भी सिर झुकाने को तैयार नहीं;पर अहंकारी सौन्दर्य के सान्निध्य में,हर प्रकार से टोपी उतारकरनतमस्तक खड़ा रहूँगा!”