साँप....!!



लग  के  दामन से मेरे फलता रहा हरदम.!

है  मेरा  अपना   बता छलता रहा हरदम.!!


था पता है साँप फितरत डसने की उसकी.!

साथ  फिर   ले  उसे  चलता   रहा हरदम.!!


विनोद सिन्हा "सुदामा"