महफूजियत..!!


ज़िंदगी महफूज़  है रब वो ख़ुदा महफूज़ है

आज़  भी दामन में माँ के हर दुआ महफूज़ है


कब है करता छोड़ माँ के शर्त बिन कोई दुआ

छोड़ माँ का दिल कहाँ वादे सफ़ा महफूज़ है


दुख रहे या सुख  रहे माँ साथ देती हर घड़ी

शख्सियत इक माँ ऐसी जिसमें वफ़ा महफूज़ है


माफ कर देती है माँ हो गलतियाँ जितनी कभी

मोह माया प्यार ममता दिल दया महफूज़ है


कौन देगा कब किधर महफूजियत इतनी कभी

साँस दिल धड़कन जहाँ हर आसरा महफूज़ है


बात हो गर सीख की तो माँ गुरू सबसे बड़ी

वक़्त जैसा हो मगर पर हौसला महफूज़ है


आजशिक्षकदिन"सुदामा' करता हर माँ को नमन

पाठशाला  माँ  जहाँ  हर  कायदा महफूज़ है


©️®️विनोद सिन्हा "सुदामा"