दहलीज़


द्वंद्वयुद्ध ...

बीच साँसों के साँसों का..

साँसें सीमा रेखा

या दहलीज़ जीस्त की

इस पार और उस पार

क्या है क्या नहीं किसे पता..?

इक आरोह अवरोह

भँवरजाल सा फैला..

जाने क्यूँ हर परत

हर तरफ मन के है रहता..!!

जीवन शेष

या स्मृति अवशेष

जन्म इस ओर या

मृत्यु : दूसरी छोर

या फिर तलाश जिजीविषा की

जो है याथार्थ जीवन की..

या शाश्वत मृत्यु

है जो पहले से खड़ी

साँसों के दहलीज़पर..


दहलीज़.जहाँ

अब भी है अविज्ञात बहुत कुछ..

लौट आना है खाली हांथ..

या लाना है भर मुठ्ठी

लड़ने को जीवन से साँसें

नहीं जानता क्या है

उसपार दहलीज़ के

चहक ज़िंदगी की या सन्नटा मौत का

नहीं जानता क्या है

उसपार दहलीज़ के...!!


©️®️विनोद सिन्हा "सुदामा"