
निकला हैं जनाजा मेरा झूम के
और फिर बजी हैं सहनाई मेरी
पहली बार सेहरा सजा था तो
आज होने को रुखसत हूं तैयार तो
सुना था लोगो की भीड़ से होगी पहचान मेरी
पर ये ना सोचा था कि मेला ही लग जायेगा
जो ना आया था कभी महफ़िल में मेरी
देखों वो भी आया हैं कहने अलबिदा
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