कविता को पढ़ते तेरी ठहर सा गया मैं

लगा कुछ शब्दों से हैं गहरा नाता मेरा


जैसे तेरे शब्दो में हो कहानी मेरी

कुछ कही और कुछ अनकही


मैं पढ़ पढ़ के सोच रहा हूँ

उस दर्द को महसूस कर रहा हूं


इतना तो मैंने भी खुद ना कहा कभी

जानें कैसे तेरे शब्दों में वो दिख रहा हैं


हैरान हूं मैं परेशान भी हूं 

तेरे दर्द को जानता जो हूं


देखना चाहूंगा तुमको मैं एक दिन

की भला कैसे तेरा दर्द भी हो सकता हैं मेरे जैसा



- विनय