
कविता को पढ़ते तेरी ठहर सा गया मैं
लगा कुछ शब्दों से हैं गहरा नाता मेरा
जैसे तेरे शब्दो में हो कहानी मेरी
कुछ कही और कुछ अनकही
मैं पढ़ पढ़ के सोच रहा हूँ
उस दर्द को महसूस कर रहा हूं
इतना तो मैंने भी खुद ना क
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कविता को पढ़ते तेरी ठहर सा गया मैं
लगा कुछ शब्दों से हैं गहरा नाता मेरा
जैसे तेरे शब्दो में हो कहानी मेरी
कुछ कही और कुछ अनकही
मैं पढ़ पढ़ के सोच रहा हूँ
उस दर्द को महसूस कर रहा हूं
इतना तो मैंने भी खुद ना क